जैसे ही दिल्ली गहरी नींद में सो रही थी, पुरानी दिल्ली के Turkman Gate इलाके में बुलडोजर की गर्जना ने रात का सन्नाटा तोड़ दिया। बुधवार सुबह फैज इलाही मस्जिद के पास के इलाके में दिल्ली नगर निगम (MCD) की बेदखली मुहिम के आसपास अचानक हालात बहुत तनावपूर्ण हो गए। पुलिस पर पत्थर फेंके गए, आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और कई घंटों तक झड़पें हुईं, जिससे राजधानी के बीचों-बीच कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर रूप से चुनौती बन गई।
आधी रात को क्या हुआ?
भारी पुलिस फोर्स के साथ MCD की एक टीम रात करीब 1 बजे तुर्कमान गेट पहुंची। प्रशासन का दावा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक गैर-कानूनी कब्ज़ों को हटाने के लिए यह मुहिम चलाई जा रही थी। इस मुहिम के दौरान, मस्जिद के पास बने एक शादी हॉल के हिस्से, दो दुकानों और तीन डिस्पेंसरी को गैर-कानूनी घोषित करके गिरा दिया गया। MCD के मुताबिक, करीब 36,400 sq ft एरिया में लंबे समय से कब्ज़ा चल रहा था और कोर्ट का ऑर्डर मिलने के बाद ही यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में 32 JCB और चार पोकलेन मशीनों समेत भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया।
अचानक तनाव क्यों बढ़ा?
हालांकि शुरुआत में कार्रवाई शांतिपूर्ण थी, लेकिन बुलडोजर के हटने के बाद हालात बदल गए। लोकल लोगों का एक ग्रुप गुस्सा हो गया और जल्द ही पुलिस और MCD कर्मचारियों पर पत्थर फेंकने लगा। जब हालात काबू से बाहर हो गए, तो पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा और आंसू गैस छोड़नी पड़ी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, झड़प में चार से पांच पुलिसवाले मामूली रूप से घायल हुए हैं।
पुलिस का क्या बयान है?
सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने कहा, “यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के साफ ऑर्डर के मुताबिक की गई है। कुछ बदमाशों ने अशांति फैलाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बहुत संयम से हालात को संभाला।”
DCP नितिन वासन ने कहा कि रात के ऑपरेशन के लिए पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे। अभी CCTV फुटेज, बॉडी कैमरा और ग्राउंड वीडियो को एनालाइज़ करके पत्थरबाज़ों की पहचान की जा रही है। यह भी बताया गया है कि उनके खिलाफ़ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

MCD का रुख
MCD के डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने साफ़ किया, “यह कोई अचानक लिया गया फ़ैसला नहीं है। मामला लंबे समय से कोर्ट में पेंडिंग था। कोर्ट के आदेश के अनुसार रेड की गई। मस्जिद की कानूनी ज़मीन के किसी भी हिस्से को नहीं छुआ गया।”
स्थानीय लोगों की आपत्तियाँ और सेंसिटिविटी
हालांकि, रेड को लेकर स्थानीय लोगों में अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का दावा है कि जिस मैरिज हॉल को गिराया गया, वह पहले कब्रिस्तान था और बाद में वहाँ गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन किया गया। कई लोगों ने देर रात रेड की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं।
यह इलाका पहले से ही बहुत सेंसिटिव है। सैयद फैज़ इलाही मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान की ज़मीन पर कब्ज़ा हटाने को लेकर एक पिटीशन अभी दिल्ली हाई कोर्ट में पेंडिंग है। कोर्ट ने पहले ही MCD, DDA, LNDO, PWD और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होनी है।
सुरक्षा के नज़रिए से भी अहम इलाका
खास बात यह है कि 10 नवंबर, 2025 को लाल किले के पास हुए हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट से पहले इस इलाके में एक संदिग्ध सुसाइड बॉम्बर को देखा गया था। उस घटना के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां तुर्कमेन गेट इलाके पर कड़ी नज़र रख रही हैं, जिससे इस ऑपरेशन के दौरान प्रशासन की सतर्कता और बढ़ गई है।
अभी क्या स्थिति है?
प्रशासन का दावा है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है और इलाके में और पुलिस तैनात कर दी गई है। हालांकि, तुर्कमेन गेट पर आधी रात को हुई इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया है कि दिल्ली जैसे शहर में कब्ज़े, धार्मिक विश्वास, सुरक्षा और कानून का टकराव कितना मुश्किल और विस्फोटक हो सकता है।