दिल्ली-NCR में ज़हरीली हवा और तेज़ ठंड: AQI 391, घने कोहरे से जन-जीवन अस्त-व्यस्त

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दिल्ली-NCR में ज़हरीली हवा

दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) इस समय गंभीर एनवायरनमेंटल संकट से गुज़र रहे हैं। एक तरफ़ कड़ाके की ठंड और दूसरी तरफ़ गंभीर एयर पॉल्यूशन ने आम लोगों की ज़िंदगी को लगभग अस्त-व्यस्त कर दिया है। सोमवार सुबह 6 बजे तक, दिल्ली का एवरेज एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 391 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बहुत खराब’ या गंभीर लेवल में आता है। ऐसे में, बाहर निकलना न सिर्फ़ रिस्की हो गया है, बल्कि कई लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।

दिल्ली में बहुत ज़्यादा पॉल्यूशन, कई इलाकों में AQI खतरनाक लिमिट पार कर गया

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली के 40 एयर मॉनिटरिंग स्टेशनों में से लगभग आधे ने गंभीर पॉल्यूशन की वॉर्निंग जारी की है। शहर के कई ज़रूरी इलाकों में AQI 400 का आंकड़ा पार कर गया है, जिसे एक्सपर्ट्स पब्लिक हेल्थ के लिए बहुत ज़्यादा खतरनाक मान रहे हैं।

सबसे ज़्यादा प्रदूषित इलाकों में शामिल हैं—

आनंद विहार: AQI 445

बाजरापुर: AQI 433

पटपड़गंज और रोहिणी: AQI 424

ITO: AQI 403

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण का यह लेवल बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, फेफड़े या दिल की बीमारी वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

पूरे NCR में यही संकट, नोएडा-गुरुग्राम में हवा ज़हरीली

दिल्ली के साथ-साथ नेशनल कैपिटल रीजन के दूसरे शहरों में भी लगभग यही हालत है। गाजियाबाद, नोएडा और गुरुग्राम में हवा की क्वालिटी लंबे समय से खराब हो रही है।

CPCB के डेटा के मुताबिक—

गाजियाबाद (इंदिरापुरम): AQI 394

गाजियाबाद (बसुंधरा): AQI 329

नोएडा सेक्टर 125: AQI 414

नोएडा सेक्टर 1: AQI 443

गुरुग्राम सेक्टर 51: AQI 355

बिकाश सदन: AQI 304

इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि प्रदूषण का असर सिर्फ दिल्ली शहर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे NCR इलाके में हालात बहुत चिंताजनक हैं।

उत्तर भारत में शीतलहर और घने कोहरे की मार

एयर पॉल्यूशन के अलावा, उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड भी एक बड़ी समस्या बन गई है। इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने कहा है कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी राजस्थान में 30 दिसंबर तक शीतलहर जारी रहेगी। इसके साथ ही घने कोहरे की चेतावनी जारी की गई है।

घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी में भारी कमी के कारण सड़क, रेल और हवाई यातायात में रुकावट की संभावना है। कई इलाकों में सुबह और रात के समय विज़िबिलिटी कुछ मीटर तक कम हो रही है, जिससे एक्सीडेंट का खतरा कई गुना बढ़ रहा है।

दिल्ली और NCR में वायु प्रदूषण का स्तर 'गंभीर', सांस लेने में दिक्कत
दिल्ली और NCR में वायु प्रदूषण का स्तर ‘गंभीर’, सांस लेने में दिक्कत

एयर ट्रैफिक पर बड़ा असर, पैसेंजर्स को वॉर्निंग जारी

घने कोहरे का सबसे ज़्यादा असर एयर सर्विसेज़ पर पड़ा है। सोमवार सुबह से दिल्ली एयरपोर्ट पर कई फ्लाइट्स लेट हो गई हैं। हालात को देखते हुए, दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटीज़ ने सुबह 7 बजे पैसेंजर्स के लिए एक स्पेशल ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।

पैसेंजर्स से रिक्वेस्ट की गई है कि वे अपनी फ्लाइट्स का स्टेटस पहले से चेक कर लें, तय समय से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचें और संबंधित एयरलाइन से रेगुलर कॉन्टैक्ट बनाए रखें।

अलग-अलग राज्यों में ‘कोल्ड डे’ के हालात

IMD ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में ‘कोल्ड डे’ के हालात बने हुए हैं। अगले कुछ दिनों में दिल्ली में मिनिमम टेम्परेचर 8 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

दूसरी ओर, अहमदाबाद में रात का टेम्परेचर गिरकर लगभग 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में 31 दिसंबर तक घना कोहरा छाया रह सकता है। उत्तराखंड में 3500 मीटर से ज़्यादा ऊंचाई पर हल्की बर्फबारी की भी संभावना है।

आम आदमी की परेशानी चरम पर

ऐसे में आम आदमी की परेशानी बढ़ती जा रही है। ऑफिस आने-जाने वाले करण मिश्रा ने कहा,
“सुबह ऑफिस के लिए निकलना बहुत मुश्किल हो गया है। ठंड और कोहरे की वजह से आगे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।”

दूसरी ओर, अनिल कुमार मिश्रा ने कहा,
“तापमान 7-8 डिग्री तक गिर गया है। कोहरा इतना घना है कि गाड़ी चलाना बुरे सपने जैसा है। आंखों में जलन होती है, सांस लेना मुश्किल होता है।”

एक्सपर्ट्स की सलाह और उम्मीद

एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक एयर पॉल्यूशन और ठंड के असर से सांस की दिक्कतें, आंखों में जलन, सिरदर्द और शरीर में तकलीफ बढ़ रही है। ऐसे में नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे बेवजह बाहर न निकलें, मास्क का इस्तेमाल करें और बच्चों और बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।

मौसम विभाग ने कहा कि आने वाले दिनों में कुछ जगहों पर हल्की बारिश होने पर एयर पॉल्यूशन थोड़ा कम हो सकता है। उम्मीद है कि नए साल के दौरान उत्तर भारत में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने पर स्थिति में कुछ राहत मिल सकती है।

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