Indore : जब इंदौर शहर पानी के गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रहा है, तो जिला प्रशासन की भूमिका पर हर जगह सवाल उठ रहे हैं। भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से कई लोग बीमार पड़ गए हैं और कई मौतें भी हुई हैं। ऐसे में, बुधवार देर रात RSS ऑफिस में इंदौर के जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और मेयर पुष्यमित्र भार्गव की मौजूदगी की खबर ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
संकट के दौरान प्रशासन की भूमिका पर सवाल
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया है कि भागीरथपुरा इलाके में गंदे पानी की सप्लाई से कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, प्राइवेट सोर्स और स्थानीय लोगों का दावा है कि मरने वालों की संख्या इससे ज़्यादा है। अब तक 446 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 50 का अभी भी इलाज चल रहा है और 10 की हालत गंभीर है।
ऐसे में, जिला प्रशासन और नगर निगम की पहले से ही कड़ी आलोचना हो रही है। वहीं, RSS ऑफिस में कलेक्टर और मेयर के बीच देर रात हुई मीटिंग की खबर ने बहस को और तेज़ कर दिया है।
RSS ऑफिस में मीटिंग किस बात पर?
सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग सुदर्शन रोड पर RSS मालवा रीजनल हेडक्वार्टर में हुई थी। मीटिंग को मालवा प्रांत के RSS प्रचारक राजमोहन ने बुलाया था। हालांकि मीटिंग को ऑफिशियली “क्राइसिस मैनेजमेंट मीटिंग” नहीं कहा जा रहा है, लेकिन पता चला है कि इसमें पानी के प्रदूषण का संकट, एडमिनिस्ट्रेटिव चूक, अलग-अलग डिपार्टमेंट के बीच तालमेल की कमी और देर से जवाब देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि फाइलें समय पर क्यों नहीं आगे बढ़ीं, जनता में एडमिनिस्ट्रेशन के खिलाफ नेगेटिव सोच क्यों है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जाए – ये मुद्दे भी चर्चा में उठे। मेयर की सफाई, कलेक्टर की चुप्पी इस विवाद पर मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि वह एक स्वयंसेवक हैं और RSS ऑफिस जाना उनके लिए नॉर्मल बात है। द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “इस दौरे का पानी के संकट या किसी एडमिनिस्ट्रेटिव फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।” दूसरी ओर, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले पर पब्लिक में कमेंट करने से मना कर दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। BJP की सफाई
BJP ने पूरे मामले को “शिष्टाचार मीटिंग” बताया है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी अलग-अलग सामाजिक संगठनों से मिल सकते हैं और इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं है। BJP का दावा है कि कांग्रेस जानबूझकर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का तीखा हमला
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को प्रशासनिक निष्पक्षता का घोर उल्लंघन बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर RSS ऑफिस के बाहर खड़े मेयर का एक वीडियो शेयर किया और सवाल उठाया – “जब लोग अस्पताल के बेड पर मौत से लड़ रहे हों, तो क्या कलेक्टर और मेयर को RSS ऑफिस में होना चाहिए?”
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक प्राइवेट संगठन के ऑफिस में प्रशासनिक मीटिंग करना लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम कर रहा है।

प्रशासनिक प्रोटोकॉल और निष्पक्षता पर बहस
इस घटना में एक बार फिर प्रशासनिक प्रोटोकॉल का मुद्दा सामने आया है। जिला कलेक्टर एक IAS अधिकारी होता है जो राज्य सरकार के प्रति जवाबदेह होता है, जबकि मेयर नगर निगम प्रशासन के तहत काम करता है। ऐसे में, जानकारों के बीच इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि किसी NGO या विचारधारा पर आधारित संगठन के ऑफिस में इस तरह की मीटिंग करना संवैधानिक रूप से कितना सही है।
मौतों की संख्या को लेकर भी कन्फ्यूजन है
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, आठ मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। लेकिन अस्पतालों में भर्ती और बीमार लोगों की संख्या और स्थानीय लोगों के बयानों से मौतों की असली संख्या पर नए शक पैदा हो रहे हैं।
सिर्फ पानी का संकट नहीं, भरोसे का संकट
इंदौर की यह घटना अब सिर्फ गंदे पीने के पानी की समस्या नहीं रही। यह एडमिनिस्ट्रेटिव अकाउंटेबिलिटी, पॉलिटिकल असर, इंस्टीट्यूशनल बाउंड्री और आम लोगों के भरोसे का गहरा संकट बन गया है। RSS ऑफिस में देर रात हुई मीटिंग ने उस संकट को और भी साफ कर दिया है।