एस्ट्रोनॉमी और ज्योतिष के हिसाब से साल 2026 का खास महत्व है। इस साल कुल चार ग्रहण हैं — दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण। पुरानी भारतीय मान्यताओं में, ग्रहण के समय को बहुत ताकतवर और सेंसिटिव माना जाता है, इसलिए इस समय को सही ढंग से समझना और सावधानी से देखना बहुत ज़रूरी है। इस आर्टिकल में, हम डिटेल में बात करेंगे — ग्रहण कब और कहाँ लगेंगे, भारत में कौन से दिखाई देंगे, सूतक का समय कैसे लगेगा, और ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें और सावधानियां क्या हैं।
2026 में कुल चार ग्रहण
2026 में ये चार ग्रहण लगने की उम्मीद है:
पहला सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी
पहला चंद्र ग्रहण – 3 मार्च
दूसरा सूर्य ग्रहण – 12 अगस्त
दूसरा चंद्र ग्रहण – 28 अगस्त
इन ग्रहणों का साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन यह है: चाहे सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण — ये सभी पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की रिलेटिव पोजीशन की वजह से होते हैं। लेकिन भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में इन्हें खास समय माना जाता है और नियम और सावधानियां बरती जाती हैं।
पहला सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी, 2026
2026 का पहला ग्रहण एक पार्शियल सूर्य ग्रहण है, जो 17 फरवरी की दोपहर को लगेगा। यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए, भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा।
इसे कहां देखें?
दक्षिण अमेरिका
ऑस्ट्रेलिया
न्यूज़ीलैंड
कुछ पश्चिमी एशियाई देश
क्योंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका धार्मिक रीति-रिवाजों या त्योहारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जिन इलाकों में यह दिखाई देगा, वहां सिर्फ वहां के धार्मिक रीति-रिवाज ही देखे जा सकेंगे।
पहला चंद्र ग्रहण: 3 मार्च, 2026 (होली का दिन)
2026 के सबसे अहम ग्रहणों में से एक चंद्र ग्रहण है, जो 3 मार्च की शाम को लगेगा और इत्तेफाक से होली के दिन पड़ रहा है। यह ग्रहण भारत में थोड़ा दिखेगा और इसके लिए सूतक काल लागू होगा — जो ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले शुरू होगा।
भारत में इसे कहां देखें?
यह चंद्र ग्रहण इन इलाकों में दिखेगा:
पश्चिम बंगाल
असम
मणिपुर
नागालैंड
मिजोरम
अरुणाचल प्रदेश

विदेश में इसे कहां देखा जा सकता है?
यह ग्रहण उन देशों में दिखेगा जहां चांद रात में दिखता है, जैसे:
चीन
जापान
थाईलैंड
म्यांमार
बांग्लादेश
ऑस्ट्रेलिया
यूनाइटेड स्टेट्स
न्यूज़ीलैंड
हालांकि यह ग्रहण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे कई बड़े शहरों में नहीं दिखेगा, लेकिन पूर्वी भारत के ऊंचे इलाकों में यह आसानी से दिखेगा।
दूसरा सूर्य ग्रहण: 12 अगस्त, 2026
2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होगा, और यह पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखेगा। ऐसे ग्रहण कोई रैंडम खगोलीय घटना नहीं हैं — ये पृथ्वी के एक्सिस और ऑर्बिट के सटीक अलाइनमेंट की वजह से होते हैं।
भारत में विज़िबिलिटी थोड़ी हो सकती है, और किसी भी बड़े ग्रहण के दौरान, विज़िबिलिटी जगह-जगह अलग-अलग होती है।
दूसरा चंद्र ग्रहण: 28 अगस्त, 2026
2026 का आखिरी ग्रहण 28 अगस्त को होगा — एक पार्शियल चंद्र ग्रहण। यह साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण है और खगोलीय रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आम लोगों के लिए दिन के समय चांद की स्थिति में काफी बदलाव होता है।
ग्रहण से जुड़ी सावधानियां और करने लायक चीज़ें
ज्योतिष के अनुसार, ग्रहण शरीर, मन और माहौल में एनर्जी को बदल देता है। इसलिए, ग्रहण के दौरान ये सावधानियां और काम करने से सीना शांत रहेगा और बुरे असर कम होंगे:
- ग्रहण के दौरान क्या न करें
- नया काम शुरू करना
- शुभ काम (शादी, गृहप्रवेश, वगैरह) करना
- गर्भवती महिलाओं को नुकीली चीज़ों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए
- फल या सब्ज़ी काटना
- भारी काम करना
- मंदिर के किसी टुकड़े को छूना या घर के मुख्य देवता को सीधे छूना
- ग्रहण के दौरान क्या करें
- ध्यान और प्रार्थना में समय बिताएं
- भगवान का नाम लें
- हनुमान चालीसा, गायत्री या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
- मन को शांत रखें और पॉजिटिव विचारों को समय दें
- ग्रहण के बाद क्या करें
- पवित्र स्नान करें (ग्रहण के बाद हमेशा करना चाहिए)
- घर और आत्मा को शुद्ध करने के लिए गंगा जल छिड़कें
- दूसरों को कपड़े, खाना या पैसे दान करें
वैज्ञानिक और धार्मिक नज़रिया
वैज्ञानिक रूप से, ग्रहण एक खुली खगोलीय घटना है — इसकी स्थिति के कारण सूरज, चांद और धरती के साथ ऐसा होता है। और धार्मिक नज़रिए से, यह एनर्जी बदलने का समय है, इसलिए सावधानी और साफ़ दिमाग बनाए रखना चाहिए।
शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के दौरान अशांति, बुरी ताकतों और बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव की संभावना होती है; इसलिए, इस दौरान रेगुलर प्रैक्टिस, प्रार्थना और धार्मिक कामों पर ध्यान देने से अच्छा असर पड़ेगा।
- 2026 में कुल चार ग्रहण होंगे — हर एक का अपना समय, दिखने का तरीका और धार्मिक महत्व है। खासकर, 3 मार्च को होली के दिन पड़ने वाला चंद्र ग्रहण लोगों में दिलचस्पी और प्रैक्टिस बढ़ाएगा। अगर समय और सावधानियों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो इन ग्रहणों को डर या बुराई का ज़रिया नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास और मानसिक शांति का मौका बनाना चाहिए।