ऐसे दरिंदों को समाज से दूर रखो। रेप के आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने आवाज़ उठाई है। बुलंदशहर हाईवे की घटना में फैसला सुना दिया गया है। पांचों दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है। दरिंदों ने एक मां और 14 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया था। यह घटना 28 जुलाई, 2016 की रात को हुई थी। 28 जुलाई, 2016 की रात को बुलंदशहर में नेशनल हाईवे 91 पर इंसानियत को तार-तार करने वाली घटना हुई थी।
कोर्ट ने क्या कहा
आठ दरिंदों ने ऐसी हैवानियत दिखाई कि जो भी सुनता, कांप उठता। उन्होंने 14 साल की लड़की और उसकी मां को दो घंटे तक बेरहमी से टॉर्चर किया। उन्होंने उनके पिता और भाई के सामने सारी हदें पार कर दीं। बूढ़े चाचा-चाची घंटों मदद का इंतज़ार करते रहे, लेकिन पुलिस नहीं आई। आज कोर्ट ने इस मामले में सज़ा सुनाई है।
कोर्ट ने इन आरोपियों के बारे में क्या कहा और घटना के बारे में क्या कहा? सज़ा क्या हुई? बुलंदशहर हाईवे कांड में आखिरकार कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। एक मां और उसके पूरे परिवार से गैंगरेप करने के जुर्म में पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने हर दोषी पर ₹1,81,000 का जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माने की आधी रकम, यानी आधी रकम पीड़िता और उसकी मां को दी जाएगी। यह फैसला स्पेशल POCSO जज ओपी वर्मा ने सुनाया। सजा सुनाते हुए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ADGC वरुण कौशिक ने कहा कि ऐसे अपराधियों को सभ्य समाज से दूर रखना चाहिए। पीड़िता के परिवार ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी।
2016 की वह भयानक रात
सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों ने कहा कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया और गलत तरीके से सजा दी गई। तो, चलिए पहले इस घटना को विस्तार से समझाते हैं। यह 28 जुलाई, 2016 की रात की बात है। नोएडा से एक परिवार के छह सदस्य तेरहवीं की रस्म में शामिल होने के लिए अपने पैतृक गांव शाहजहांपुर जा रहे थे। जब उनकी कार देहात थाना इलाके में दोस्तपुर फ्लाईओवर पर पहुंची, तो अज्ञात हमलावरों ने लोहे की रॉड फेंककर कार रोक ली। इसके बाद हमलावरों ने लड़की, उसके माता-पिता, चाची, चाचा और चचेरे भाई को बंधक बना लिया।
उन्हें कार समेत सड़क के उस पार एक खेत में ले जाया गया। वहां आरोपियों ने तीनों के हाथ-पैर बांध दिए और 14 साल की लड़की और उसकी मां को खेत में ले जाकर उनके साथ गैंगरेप किया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने परिवार के साथ लूटपाट की और भाग गए। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। एक आरोपी की बीमारी के कारण जेल में पहले ही मौत हो चुकी है। एक अलग मामले में पुलिस एनकाउंटर में दो और आरोपी मारे गए।

जांच में पुलिस की नाकामी और CBI
CBI जांच में बावरिया गैंग के सदस्य जुबेर उर्फ सुनील उर्फ परवेज के साथ सलीम उर्फ बीना उर्फ दीवानजी और साजिद का नाम सामने आया है। इनके खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट फाइल की गई और 11 अप्रैल 2017 को केस फ्रेम हुआ। बाकी तीन आरोपियों को सबूतों की कमी के कारण जांच से हटा दिया गया। मामले की शुरुआती जांच में लोकल पुलिस की तरफ से बड़ी लापरवाही के सबूत मिले।
SSP समेत 17 पुलिस अफसरों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई हुई। शुरुआत में पुलिस ने तीन बेगुनाह लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्हें बाद में बरी कर दिया गया। बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर जांच CBI को सौंप दी गई। करीब नौ साल बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार और समाज इंसाफ की बड़ी जीत मान रहा है। हालांकि, पीड़ित परिवार का तर्क है कि ऐसे अपराधों के लिए और कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
इस पूरे मामले पर सरकारी वकील वरुण कौशिक का क्या कहना है? आइए सुनते हैं। आज माननीय कोर्ट ने सभी पांचों आरोपियों को उन्हीं धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिनके तहत कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया था। सजा सुनाकर कोर्ट ने समाज को यह भी मैसेज दिया कि ऐसे खूंखार अपराधियों को सभ्य समाज से दूर रखना चाहिए। उन्हें हमेशा पर्दे के पीछे रहना चाहिए।
सज़ा और रिएक्शन
केस में असल में क्या हुआ था? हम सब जानते हैं कि यह बहुत चर्चित केस था। 2016 में, दोजपुर हाईवे पर बदनाम अपराधियों ने रेप और लूट की घटना को अंजाम दिया था। 2016 में, पीड़ित का परिवार गाजियाबाद से शाहजहांपुर एक फंक्शन में शामिल होने जा रहा था। जब वे दोजपुर पहुंचे, तो रात 1:30 बजे किसी ने उनकी कार पर कुछ फेंका। फिर, जब पीड़ित के पिता कार चेक करने के लिए कार से उतर रहे थे, तो पांच से सात लोगों ने उन्हें गनपॉइंट पर पकड़ लिया, उन पर हमला किया और पीड़ित की मां और उसकी मां के साथ रेप किया।
इंसाफ के लिए लंबी लड़ाई
सबसे ज़रूरी सबूत यह था कि एक आरोपी के पेटीकोट का DNA पीड़ित की मां के पेटीकोट से मैच कर गया था। सर, इस केस में कितने आरोपियों पर चार्ज लगाए गए और किसे दोषी ठहराया गया? कुल छह आरोपियों पर चार्ज लगाए गए थे। एक आरोपी सलीम की 2019 में ट्रायल के दौरान जेल में मौत हो गई, जबकि बाकी का ट्रायल चल रहा था।
माननीय कोर्ट ने आज उन सभी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। आइए जानते हैं कि कोर्ट के फ़ैसले पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर बृजेश पाठक ने क्या कहा।
कोर्ट ने गैंग रेप केस में आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। हमारी सरकार ने कोर्ट के ज़रिए महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ ऐसे सभी मामलों में सख़्त सज़ा की वकालत की है। इस केस में भी उम्रकैद हुई। हम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हैं, और यह अपराधियों के लिए एक चेतावनी है। अपनी लाइफ़स्टाइल सुधारें।