खाड़ी देशों में 1.5 मिलियन नौकरी के United Arab Emirates: भारतीयों के लिए यह एक सुनहरा अवसर क्यों है

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United Arab Emirates jobs

United Arab Emirates (UAE) और सऊदी अरब—ये दो खाड़ी देश अगले कुछ सालों में दुनिया भर में रोज़गार के माहौल में बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। हाल ही में हुई एक Global Workforce Study के मुताबिक, 2030 तक इन दोनों देशों में 1.5 मिलियन से ज़्यादा नई नौकरियाँ बन सकती हैं। इतना ही नहीं, अगले पाँच सालों में हर साल औसतन लगभग 3 लाख नई नौकरियाँ बनने की उम्मीद है। यह आँकड़ा विदेश में काम करने में दिलचस्पी रखने वाले भारतीयों के लिए बेशक अच्छी खबर है।

सवाल यह है—अचानक इतनी बड़ी संख्या में नौकरियाँ क्यों बन रही हैं? और इस मौके में भारतीयों की भूमिका कितनी ज़रूरी है?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़माने में भी नौकरियाँ क्यों बढ़ रही हैं?

अभी दुनिया भर में यह आम सोच है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन से नौकरियों के मौके कम हो जाएँगे। लेकिन UAE और सऊदी अरब के मामले में असलियत बिल्कुल उलट है। रिसर्च बताती है कि भले ही AI काम का तरीका बदल रहा है, लेकिन यह इंसानी कामगारों की कुल माँग को कम नहीं कर रहा है।

इसके उलट, इन दोनों देशों में लेबर मार्केट मज़बूत इकोनॉमिक ग्रोथ, सरकारी सुधारों, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और सर्विस सेक्टर के विस्तार की वजह से बढ़ रहा है। यानी, टेक्नोलॉजी जितनी तेज़ी से बढ़ रही है, लोगों की ज़रूरत भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही है।

सऊदी अरब: विज़न 2030 से जॉब ग्रोथ

इस एम्प्लॉयमेंट ग्रोथ का मुख्य ड्राइवर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का बड़ा विज़न 2030 प्रोग्राम है। इस विज़न का मकसद सऊदी अरब को तेल पर निर्भर इकोनॉमी से एक डायवर्सिफाइड, मॉडर्न इकोनॉमी में बदलना है।

इस पहल के तहत:

बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स

नए इकोनॉमिक ज़ोन

टूरिस्ट शहर और रिसॉर्ट

मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब

पहले ही शुरू हो चुके हैं। स्टडी में कहा गया है कि ऑटोमेशन के बावजूद, सऊदी अरब को आने वाले सालों में लेबर की गंभीर कमी का सामना करना पड़ेगा और इस कमी को पूरा करने के लिए वह विदेशी वर्कर्स पर ज़्यादा निर्भर रहेगा।

संयुक्त अरब अमीरात: सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला लेबर मार्केट

दूसरी ओर, संयुक्त अरब अमीरात भी ज़्यादा पीछे नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE का टोटल वर्कफोर्स 2030 तक 12.1 परसेंट बढ़ सकता है, जो स्टडी में शामिल देशों में सबसे ज़्यादा है। सऊदी अरब में यह रेट लगभग 11.6 परसेंट है।

US या UK जैसी डेवलप्ड इकॉनमी की तुलना में, लेबर मार्केट की ग्रोथ बहुत धीमी है। इससे साफ़ पता चलता है कि आने वाले दशक में खाड़ी देश ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट हब में से एक बन जाएंगे।

खाड़ी देशों में 1.5 मिलियन नौकरियां
खाड़ी देशों में 1.5 मिलियन नौकरियां

किस सेक्टर में जॉब की ज़्यादा डिमांड है?

स्टडी के मुताबिक, UAE और सऊदी अरब में जिन सेक्टर में वर्कर्स की डिमांड तेज़ी से बढ़ेगी, वे हैं—

मैन्युफैक्चरिंग

एजुकेशन

रिटेल

हेल्थकेयर

फाइनेंशियल सर्विसेज़

इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और टेक-रिलेटेड सर्विसेज़

भारतीय वर्कर्स के पास इन सभी सेक्टर में लंबे समय का एक्सपीरियंस और एक्सपर्टीज़ है।

यह भारतीयों के लिए एक बड़ा मौका क्यों है?

खाड़ी देशों में बाहर से आए वर्कर्स का एक बड़ा हिस्सा भारत छोड़ देता है। UAE और सऊदी अरब ने हमेशा भारतीय वर्कर्स को उनकी स्किल्स, मेहनती सोच और कम खर्च में काम करने की काबिलियत की वजह से पसंद किया है।

इसके अलावा:

भारतीय लोग इंग्लिश और टेक्निकल काम में अच्छे होते हैं

हेल्थ, एजुकेशन और IT सेक्टर में भारत की मज़बूत स्थिति

पहले से ही एक बड़ा भारतीय डायस्पोरा

इन वजहों से, आने वाले दिनों में नई नौकरियों का एक बड़ा हिस्सा भारतीयों को मिलने की उम्मीद है।

ये नौकरियां कब दिखेंगी?

हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 2030 तक 1.5 मिलियन नौकरियों की पूरी संभावना होगी—

अगले 2-3 सालों में रिक्रूटमेंट प्रोसेस तेज़ हो जाएगा

अगले पांच सालों में नौकरियों की एक बड़ी लहर दिखेगी

यानी, जो लोग अभी तैयारी करेंगे, वही इस मौके का पूरा फ़ायदा उठा पाएंगे।

आखिर में

अगर आप भारत में जॉब मार्केट को लेकर अनिश्चित महसूस कर रहे हैं, विदेश में काम करने का सपना देखते हैं और एक लॉन्ग-टर्म करियर बनाना चाहते हैं, तो UAE और सऊदी अरब में आने वाली नौकरी की ग्रोथ आपके लिए एक असली और ज़रूरी मौका है।

सवाल यह है—
क्या आप मौका आने से पहले खुद को तैयार कर रहे हैं?

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